हंस पत्रिका – नवम्बर अंक – 2018

(4 customer reviews)

30.00

4 reviews for हंस पत्रिका – नवम्बर अंक – 2018

  1. V kumar

    I liked it

  2. कृष्ण मनु

    समसामयिक विषयों पर यथार्थपरक रचनायें शामिल कर पाठकों के बीच पहुंचाने में पत्रिका का पहला स्थान है।

  3. अनवर सुहैल

    समकालीन कथा और सामयिक राजनीतिक सोच की प्रतिनिधि पत्रिका हंस।

  4. janakdev janak

    हंस का नवंबर 2018 अंक पढ़ा. ‘ ई सब का चल रहा है मोटा भाई?’ आपका संपादकीय बेमिसाल है. केरल की शत प्रतिशत आबादी साक्षर है, बावजूद यहां अंधविस्वास की कमी नहीं है. सबरीमाला मंदिर में स्त्रियों के प्रवेश पर बबाल मचा हुआ है. केरल का आरएसएस सहित दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों का संयम डिग गया है. मंदिर में प्रवेश के नाम पर महिला पत्रकारों के साथ बदसलूकी तक उतर आए हैं. आए दिन बबाल हो रहा है. संपादक जी ने ठीक ही कहा है कि ‘लगोट के कच्चे आसानी से फिसल जाने वाले ईश्रवर कम….आशाराम के अवतार अधिक प्रतीत होता है….’सबरीमाला मंदिर संचालन समिति प्रमुख गोपाल कृष्णन का कथन घटिया सोच का परिचायक है. उनका कथन‘ स्त्रियों की शुद्धता की जांच आधुनिक मशीन अविष्कार तक उनका मंदिर में प्रवेश निषेध रहेगा. प्रवेश करने वाली स्त्रियों की सुरक्षा नहीं कर पाएंगे. अगर उनका प्रवेश होता है तो यह जगह थाईलैंड की तरह सैक्स टुरिज्म स्थल बन जाएगा. ’ भला इससे ज्यादा अपमान महिलाओं का क्या हो सकता है. लगता है जैसा देवता वैसा ही उनका भक्त भी है. सबसे बड़ी बात है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी पार्टियां अपनी अपनी सीमा लांघ कर इस मुद्दे पर एकमत है. हंस की कहानियों में लेखिका दीपक शर्मा की कहानी‘ फ्री हैंड’ में खूबसूरत रेखा चित्र का समायोजन मन को आकर्षित करता है. यह तो तय है कि हर कोई कार्टूनिषट नहीं हो सकता. लघु कथा ‘चपत’ में लेखक रंजित सिंह गहलोत ने दो पाया हिरनियों को अपना दैहिक सुख सम्मान के साथ लूटने का पैगाम दिया है. अन्य रचनाएं भी शोधपरक व पठनीय है.

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