बोरे में सोना

वैसे तो मैं और मेरा परिवार अब शहर में ही रहता हैं, पर कुछ न कुछ काम से अक्सर हम गाँव जाते रहते हैं। मुझे गाँव में जाना बहुत ही अच्छा लगता हैं। गाँव में जाकर बड़ा सुकून, बड़ी शांति मिलती हैं। ना व्यापार की चिंता, ना ग्राहकों के फोन। मुझे यदि दो विकल्प दिए जाए कि सात दिन के लिए तुम्हें विदेश घूमने जाना हैं या गाँव, तो मैं अपने गाँव को ही चुनुँगा। कुछ खास बात होती हैं अपनी मातृभूमि की, जहाँ आपने जन्म लिया, जहाँ आपका बचपन बीता, जहाँ आप स्कूल गए। घर वाले अक्सर पूछते हैं अब तो गाँव खाली होता जा रहा हैं फिर भी तुझे वहाँ जाना क्या अच्छा लगता हैं? बात भी सही हैं,

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अधूरा ख्वाब

एक आहट-सी सुनी थी मैंनेपीछे मुड़ के देखा भी था … वहां उस वक्त तो कोई नहीं था पर उस आहट में कुछ तोदिखा था,शायद सिर्फ़ एक परछाई यामहज़ एक कल्पना मात्र या शायद किसी का वो अधूरा ख्वाबजो उस अंधेरी रात में भी कहींकोने में बैठा जुगनू की तरहचमक रहा था ।।

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