पांडे़ कौन कुमति तोहें लागी
8 अप्रै., 2026

पांडे़ कौन कुमति तोहें लागी

पांडे़ कौन कुमति तोहें लागीकाशीनाथ सिंह कहना तन्नी गुरु का कि अस्सी-भदैनी का ऐसा कोई घर नहीं जि...

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नायक, खलनायक, विदूषक
1 अप्रै., 2026

नायक, खलनायक, विदूषक

अमित यहां बैठे-बैठे भी अच्छी तरह जानता है कि भीतर के कमरे में पारुल इस समय खींच-खींचकर बाल झाड़ रही...

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आत्मकथा, यानी भीतर-बाहर झांकने की खिड़की
1 अप्रै., 2026

आत्मकथा, यानी भीतर-बाहर झांकने की खिड़की

चाहें तो इसे संयोग कह लें कि साल का प्रारंभ और अंत दो आत्मकथाएं पढ़ते हुए ही हुआ। दोनों के प्रमुख पा...

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मैं हवा पानी परिंदा कुछ नहीं...
25 मार्च, 2026

मैं हवा पानी परिंदा कुछ नहीं...

दोपहर कबूतर के पंख की तरह थी. सुरमई, मुलायम और बहुत हल्की. इतनी हल्की कि किसी का भी मन उड़ने को कर सक...

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वर्चस्व और संवैधानिक चेतना की यात्रा: होमबाउंड- गोविंद निषाद
25 फ़र., 2026

वर्चस्व और संवैधानिक चेतना की यात्रा: होमबाउंड- गोविंद निषाद

प्रेम और परिवार की पारंपरिक धारणाओं से लेकर जाति-विरोधी चेतना, स्त्री - मुक्ति, श्रमिक संघर्ष, किसा...

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छद्म स्थापनाओं को कटघरे में खड़ा करती ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ -नीरा जलक्षत्रि
18 फ़र., 2026

छद्म स्थापनाओं को कटघरे में खड़ा करती ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ -नीरा जलक्षत्रि

अरण्य सहाय द्वारा निर्देशित ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ फिल्म अपने प्राकृतिक दृश्यों में सिनेमेटिक भाषा में...

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