पांडे़ कौन कुमति तोहें लागीकाशीनाथ सिंह कहना तन्नी गुरु का कि अस्सी-भदैनी का ऐसा कोई घर नहीं जि...
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अमित यहां बैठे-बैठे भी अच्छी तरह जानता है कि भीतर के कमरे में पारुल इस समय खींच-खींचकर बाल झाड़ रही...
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चाहें तो इसे संयोग कह लें कि साल का प्रारंभ और अंत दो आत्मकथाएं पढ़ते हुए ही हुआ। दोनों के प्रमुख पा...
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दोपहर कबूतर के पंख की तरह थी. सुरमई, मुलायम और बहुत हल्की. इतनी हल्की कि किसी का भी मन उड़ने को कर सक...
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प्रेम और परिवार की पारंपरिक धारणाओं से लेकर जाति-विरोधी चेतना, स्त्री - मुक्ति, श्रमिक संघर्ष, किसा...
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अरण्य सहाय द्वारा निर्देशित ‘ह्यूमन्स इन द लूप’ फिल्म अपने प्राकृतिक दृश्यों में सिनेमेटिक भाषा में...
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