ना पढ़े जाने वाला लेखक

डोंट रीड मी..!———————-ना पढ़ा जाने वाला लेखक होने के कई फायदे हैं..। अभी परसों ही मैंने तीसरी क्लास के अपने पहले क्रश से इज़हार-ए-मोहब्बत वाली कहानी दागी..। आप सोच सकते हैं मैं ये बकलोली करने यहां नहीं बैठा होता अगर आपकी भाभी जी उसे पढ़ लेतीं..। अपने अब तक के रिकॉर्ड को देखकर पूरा यकीन था कि वो क्रश वाली मोहतरमा भी नहीं पढ़ेंगी..। लेकिन वो आशिकों वाली चुल और उस पर ठहरा पत्रकार..मैंने ना सिर्फ उसे टैग किया बल्कि डेढ़ दर्जन मीडिया संस्थानों से बटोरे घाघपने का पूरा सदुपयोग करते हुए गजब का क्लिकबेट शीर्षक भी चिपकाया- “वो शाम को होमवर्क के बहाने उसके साथ क्या करने आया था..?” या फिर “आखिर क्या हुआ कि राज की हो ना

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