स्मरण- राजेन्द्र यादव

स्मरण: राजेंद्र यादव  आप जीवित रहेंगे युगो- युगो तक किसी भी साहित्य प्रेमी के जीवन में एक ऐसा समय जरूर आता है जब वह किसी ना किसी साहित्यकार के सम्मोहन में पड़ा उसकी रचनाएं एक के बाद एक पढ़ता चला जाता है। व्यक्तिगत रूचि का यह आलम अमूमन किसी भी साहित्य प्रेमी के जीवन में यूं ही नहीं आ जाता और ना ही वह अपने प्रिय रचनाकारों की लिस्ट में किसी भी चलते हुए लेखक को शामिल करता है , ऐसा गजब का सम्मोहन तभी पैदा होता है जब कोई रचनाकार किसी साहित्य प्रेमी के दिलों दिमाग पर कुछ ज्यादा ही छाया हुआ हो , कुछ यूँ  की एक के बाद एक पन्ने पलटते हुए कहानियों की कहानियों से लेकर

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