ऱफ्तार जिदंगी की

रफ्तार जिंदगी की बेशक माहौल बोझिल, आंखों में खौफ का मंजर, फिजा में मौत का दहशत और दिलों में उदासी है। हर शख्स एक दूसरे से फासले बनाकर रहने को मजबूर है। परंतु आप यकीन करें आज दूर- दूर होते हुए भी हम इतने निकट कभी नहीं रहे… आप खुद किसी के भी दिल में झांक कर देख लीजिये वहां आपको अपने लिए भी सलामती की दुआओं में झुके हुए सिरों का, बुदबुदाते होठों का, जुड़े हुए हाथों का अक्स नजर आएगा। हमने यह जान लिया है कि मंदिरों की घंटियों की सुमधुर आवाज से हम वंचित रह सकते हैं, गुरद्वारे केअरदास के लिए तरस सकते हैं, मस्जिदों की अजान से महरुम हो सकते है, चर्चों के सूने गलियारे की

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