कविताएँ

1.पिता से बात……! पिता से बात करते हुए ऐसा लगता हैजैसे आसमान से बात करना। आसमान जानता है संसार की सारी बातेंइसलिए पिता से बात करते हुएमैं सारे संसार से मिल लेता हूँ। संसार घूमने से अच्छा हैपिता के साथ घूम लेना। पिता के साथ घूमते हुएआसमान को नापते देर नहीँ लगती। *********** 2. पिता से दूर रहकर….! पिता के दुखते हुए हाथ,सुख का सृजन करते हैंअन्तस् में दबी हुई वेदनाओं के बीच में सेखिंच लाते हैं मुस्कुराहटअपने गहन होंठो परसिर्फ मेरे लिए! पिता कहते हैं“मेरी सुख की दुनिया सिर्फ तू ही हैबाकी बची दुनिया ग्लोब जैसी है गोल-गोल”पिता कहते हैं,”इस ग्लोब जैसी दुनिया कोमैंंने कभी समझना नहीँ चाहा!” बस एक मुझे ही समझने में उन्हें सरलता रही हैऔर पिता

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