चलो कुछ दीपक

चलो कुछ दीये,उन मुंडेरों पे रख आयें,जहां अंधेरा आज भी है,थोड़ी रोशनी ले जायेंजो दिल उदास हैं सदियों से,क्यों ना उनसे खुशी बांट आयें।ज़िद करें बस अपने घर की रोशनी के लिए,अरे! हम इतने स्वार्थी ना हो जायेंक्या मिला है इक्ट्ठा करके,चलो बांटे, खुशियां ले आयेंबाहर का अंधेरा तो लाज़मी है,चलो मन का अंधेरा मिटायें चलो कुछ दीये,उन मुंडेरों पे रख आयें… …….गौतम

Read more