जो फिर कभी नहीं लौटते

रेलवे स्टेशन बहुत छोटा था.यदा-कदा पैसेंजर गाड़ियां ही शायद यहां रुका करती होंगी. रात के ठीक बारह बज रहे थे. ठंड का मौसम था. संयोग से उस दिन उस स्टेशन पर उतरने वाला वह एकमात्र यात्री था. आम तौर पर स्टेशन पर चहल-पहल रहती है पर वह स्टेशन उस वक्त एक सुनसान सी जगह लग रही थी. ठंड के मौसम में स्टेशन मास्टर अपने ऑफिस के कमरे में दुबका हुआ था और सिग्नल दिखाने वाला पोटर स्टेशन के एकदम आखरी छोर पर आग जलाकर ताप रहा था. इस स्टेशन पर इतनी रात उतरे भी कौन ? एक तो एकदम गांव से बाहर ऊपर से गांव तक जाने की कोई सुविधा भी नहीं. वह कुछ देर वहीं सुनसान प्लेटफॉर्म पर टहलता

Read more

चरित्र

बेहद अव्वल दर्जे का बेवकूफ। कोई एक चीज़ अगर उससे लाने को बोलें तो उसमें कई घण्टे लगा दे। कभी-कभी तो मुझे लगता था कि वह किसी नशीले पदार्थ का सेवन करता है। लेकिन जब भी मैं उससे यह पूछता वह कहता “साहब मैं कुछ लेना तो छोड़िये इन चीजों को हाथ तक नहीं लगाता”। मुझे पता था कि वह झूठ बोल रहा है। क्योंकि कई दफ़ा मैंने उसे बीड़ी पीते हुए पकड़ा था। उसमें औसत से भी कम दर्जे का दिमाग़ था। उसके लिये यह बात पुख़्ता थी कि जब ऊपरवाला दिमाग़ बाँट रहा था तब वह शायद सो रहा होगा। शरीर से मैं उसे स्वस्थ्य तो नहीं कह सकता। लेकिन उसे कोई बीमारी हो ऐसा भी नहीं लगाता

Read more

खर्चापानी

चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही जनता यकायक महत्वपूर्ण हो उठी । साधारण लोग जो मिनिस्टर, नेताओं, अफसरों के पीछे छोटे-बड़े काम के लिये चप्पल घिसा करते थे, इस समय पासा पलट जाता है, आज उनके पीछे बड़े-बड़े नेता और राजनैतिक पार्टियाँ घूम रहीं थीं । वे शक्ति पाने के लिये प्रजा के दरबार में चक्कर लगा रहे थे । प्रजातंत्र की यही सबसे बड़ी खूबी है, सत्ता के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को जनता के आंगन में आना ही पड़ता है । इस समय चतुर राजनैतिक पार्टियाँ जनता को गाय के समान समझने लगतीं हैं, जिसे दूहने के लिये वे तरह–तरह का चारा फेंकती हैं । कोई पार्टी उन्हें भविष्य का सुनहरा सपना दिखाती है तो कोई उपहार बाँटती है,

Read more

आई. सी. यू.

मेरा तीसरा दिन है इस सात मंजिले बड़े अस्पताल में। इस अस्पताल में आई. सी. यू. के बाहर एक बड़ा हॉल है जिसमें ट्रेन के बर्थ की तरह बेड लगे है। आई. सी. यू. में एडमिट मरीज के किसी एक परिजन को इसमें रुकने की इजाजत दी जाती है। मुझे भी एक बेड दिया है इसी हॉल में। मेरे बाजू वाले बेड पर जो आदमी है वो सिर्फ मरीज से मिलने या सोने टाइम ही आता है। मुझ से बड़ा है उम्र में। मस्त दाढ़ी बढ़ा रखी है। जब भी आता है पीठ पर एक बैग टांगे रहता है। उसके फॉर्मल कपड़े और काले जूते से लगता है कि वो किसी ऑफिस से आ रहा है। हर वक्त गुमसुम और

Read more