धरातल से ऊपर कैसे हुआ जाता है

प्रिय कवि प्रखरबतलाएँकि वक़्त के विपरीतप्रकृति से विकृतभविष्य मे जाकर अतीत की कविताकैसे लिखी जाती है सुबह की कविता सुलगती दोपहरी मेंरात्रि  का विरह निर्मल भोर मेचीख़ों-कराहों के बीच रोष मे नारों के शोर मेइस अराजकता के दौर में  भीसुकून की कविता कैसे लिखी जाती हैदिन उजाले मे होते हो रेपऔर रात के अंधेरे मे शवदाहवैमनस्य फैला होमन-मस्तिष्क मैला होदेह से दिलों तक भरी हो सिहरनएसे वक़्त मे प्रेम की कविता कैसे लिखी जा सकती है बलात्कार के दृश्यों से उभरकरऔपचारिकता के लिए कुछ पल सिहरकरचुभते नाखूनोंचोक होते नधूनों को बिसरकरलज्जा के सदमों से उभरकरवत्सल की कविता कैसे लिखी जा सकती है छाती मे उठता है जो उबालवो जो एक कंपकंपी सी छूटती हैमन  के भावों  हृदय के घावों के

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