उतरन

एक कुर्ती निकली अलमारी से अपनी कुछ पुरानी-सी कुछ बेरंग-सी थोड़ी फटी थी और थोड़ी गई थी उधड़ अलमारी से निकाल पटक दिया उसे ज़मीं पर इस सोच के साथ कि- मुझ पर नहीं फबेगी अब ये… मेरे घर के पीछे एक छोटी झोपड़ी में रहती है एक लड़की चेचक के दाग़ से भरा हुआ है चेहरा उसका हमउम्र होगी शायद या कुछ छोटी तो मैंने अपनी वो फटी हुई कुर्ती देदी उसे मैं नहीं पहन सकती, पर वो तो पहन सकती है फिर दिन बीतते गए और मैं भूल गई उस कुर्ती को… एक रोज़ मैंने देखा उस लड़की को कितने करीने से संवरे हैं बाल उसके आज आँखों में काजल है, माथे पर बिंदी, झुमके भी पहने हैं,

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