कबीर की ‘गुरुदेव कौ अंग’ के आधार पर शिक्षण प्रक्रिया की विवेचना

आलेख रंजीत कुमार यादवशोधार्थी –दिल्ली विश्वविद्यालयMobile number -9910829645Email- jeetyaduvanshi@gmail.com कबीर की ‘गुरुदेव कौ अंग’ के आधार पर शिक्षण प्रक्रिया की विवेचनामध्यकालीन दौर के होते हुए भी कबीर अपने आधुनिक विचारों के कारण आज भी स्मरणीय हैं । अपनी साखियों एवं पदों में अपनी क्रांतिधर्मिता के कारण कबीर उस समय भी उतने ही प्रासंगिक थे जितने कि आज हैं या यह कहना ज्यादा उचित होगा कि कबीर आज के बाजारवाद और उपभोक्तावादी संस्कृति के दौर में जहाँ हर चीज अर्थ केंद्रित हो गयी है वहां उनकी प्रासंगिकता और बढ़ जाती है, आज स्थितियां और भी गंभीर हो गयी हैं । भक्तिकाल के उस समाज में सामाजिक कुरीतियाँ, पाखण्ड, धार्मिक अन्धविश्वास और जातिगत भेदभाव फैला हुआ था । कबीर ने इन सब

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