रोहित प्रसाद पथिक की कविताएँ

।। कविताएँ ।। 1. तुम मर तो नहीं सकते हो ! जहां से क्लियर होता है ब्रह्मांड जहां सिर्फ मौत के पौधे उगते हैं आहिस्ता-आहिस्ता वचन को पढ़कर तुम एक देश नहीं बदल सकते मैं जानता हूं काले विचारों से होकर युद्ध करना होगा तुम्हें क्योंकि विचार फक्कड़ है फिर तुम्हें एक विशालकाय बीज से भी मौत के स्वर बदलने होगें एकमात्र बची रहेगी यह धूसर जमीन तुम ध्वस्त करने तो निकल गए हो लेकिन एड़ी को मजबूत कर लेना ईट को लोहा बनाकर लाठियों से प्रेम करना किताबों में लिखे शब्दों को बुलाकर नई किताबों को लिखना क्योंकि हर पांडुलिपि धोखेबाज होती है तुम अब तक लड़ रहे थे अपने वजूद के लिए अचानक तुम्हारा मस्तिष्क एकांत हाथों में

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