इवेंट मैनेजमेन्ट कम्पनी

इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी (लघुकथा)

वो पढ़ा लिखा था ,दिल्ली में एक वाइट कालर जॉब के लिये एक मुद्दत से प्रयासरत था ।शाहदरा से रोहिणी तक उसने अपना बॉयोडाटा दे रखा था नौकरियों के लिये।सुबह वो आनन्द विहार से मेट्रो पकड़ लेता था और गुड़गांव तक जाता था बाज़ार की हर जरूरत के अनुसार उसने ट्रेनिंग ली थी ,अंग्रेजी बोलने से लेकर कंप्यूटर पर काम करने तक लेकर।।मगर दिल्ली में नौकरियां रहीं ही नहीं थीं , ब्लू कॉलर वाले जॉब निकल रहे थे ,कामगारों के लिये ही रोजगार थे ,डिग्री वाले बेकार थे ,,दिल्ली में नौकरियां थीं ही नहीं लेकिन नौकरियों के तलबगार बेइन्तहा थे।
हरिओम ने घर घर जाकर ट्यूशन पढ़ाने के लिये प्रयास किये लेकिन दिल्ली में बच्चों पर बढ़ते जुर्म और उनकी जागरूकता के सबब वो अपनी दाल रोटी भी गंवा चुका था ।कई दिन उसने गुरूद्वारे पर लंगर छककर बिताये ,मगर उसकी आत्मा उसे जलील करती रही कि दान की वस्तु पात्र व्यक्ति के लिये होती है और वो उसके पात्र नहीं है । किसी ने उसे सुझाया कि इवेंट मैनेजमेंट कम्पनियों से सम्पर्क करो ।उसने अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया।
उस कम्पनी ने बॉयोडाटा लिया ,इंटरव्यू में कम्पनी के मालिक से उसने पूछा “काम क्या होगा “?
भल्ला ने कहा “काम बदलता रहेगा ,हुलिया भी तुम्हे बदलते रहना होगा ।आम तौर पर जंतर -मंतर ,रामलीला मैदान जैसी जगहों पर धरना -प्रदर्शन करना होगा।रैली,घेराव, स्याही फेंकना ,नारे लगाना जैसे रोजर्मरा का काम होगा “।
“ये तो काफी टफ काम होगा “उसने सहमते हुए कहा भी और पूछा भी ।
“पेमेंट भी अच्छे हैं ,वैसे ये टफ काम नहीं है,ये बेसिक लेवल के काम हैं ।एक मैसेज पर लोग पहुंच जाते हैं। टफ काम का इंसेंटिव भी बढ़िया है मगर डेफिनिशन भी अलग है ।टफ कामों में लाठीचार्ज में सबसे आगे आना,वाटर गन पर डटे रहना,पब्लिक प्रॉपर्टी की तोड़ फोड़ करना और बैरिकेडिंग को तोड़ना जैसे एडवांस लेवल के काम करना “।
“कोई ख़ास वजह मुझे इस सबमें योग्य मानने का “उसने अपनी जिज्ञासा प्रकट की ।
“पहली बात तुम्हे अंग्रेजी आती है जो कि टीवी पर बाईट वगैरह आसानी से दे सकते हो ,हिंदी में भी,अंग्रेजी में भी । दूसरा तुम थियेटर बैकग्राउंड से हो तो गेटअप भी चेंज कर सकते हो ।धोती वाले मजदूर किसान से लेकर पैंट शर्ट वाले युवक तक ।सो हमें मीडिया के लिए लुक्स पर काम करना नहीं पड़ेगा।क्योंकि मीडिया लुक्स पर ही परसेप्शन बनाता है ।
“लेकिन अगर मैं घायल हो गया तो ,पुलिस की गोली से मारा गया तो ,कोई गारंटी है सेफ्टी की “उसने पूछ लिया।
“अगर घायल हुये तो हम इलाज कराएंगे और और फिट होने तक पैसा देते रहेंगे “।
“और अगर मर गया तो “ उसने सख्ती से पूछा ?
“तो सरकार पैसा देगी ,ये तो तुम जानते ही हो कि सरकार की कार्यवाही का विरोध में मारे जाने वाले को पैसा देती ही है “।
उसने थोड़ी देर तक विचार किया ,फिर उस ऑफर को स्वीकार कर लिया।वो सोच रहा था कि इंसान की जिंदगी और मौत अगर सिर्फ एक इवेंट है तो वो भी एक इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी खोलेगा देर सबेर ,,,
समाप्त

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