खर्चापानी

चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही जनता यकायक महत्वपूर्ण हो उठी । साधारण लोग जो मिनिस्टर, नेताओं, अफसरों के पीछे छोटे-बड़े काम के लिये चप्पल घिसा करते थे, इस समय पासा पलट जाता है, आज उनके पीछे बड़े-बड़े नेता और राजनैतिक पार्टियाँ घूम रहीं थीं । वे शक्ति पाने के लिये प्रजा के दरबार में चक्कर लगा रहे थे । प्रजातंत्र की यही सबसे बड़ी खूबी है, सत्ता के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति को जनता के आंगन में आना ही पड़ता है । इस समय चतुर राजनैतिक पार्टियाँ जनता को गाय के समान समझने लगतीं हैं, जिसे दूहने के लिये वे तरह–तरह का चारा फेंकती हैं । कोई पार्टी उन्हें भविष्य का सुनहरा सपना दिखाती है तो कोई उपहार बाँटती है,

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आई. सी. यू.

मेरा तीसरा दिन है इस सात मंजिले बड़े अस्पताल में। इस अस्पताल में आई. सी. यू. के बाहर एक बड़ा हॉल है जिसमें ट्रेन के बर्थ की तरह बेड लगे है। आई. सी. यू. में एडमिट मरीज के किसी एक परिजन को इसमें रुकने की इजाजत दी जाती है। मुझे भी एक बेड दिया है इसी हॉल में। मेरे बाजू वाले बेड पर जो आदमी है वो सिर्फ मरीज से मिलने या सोने टाइम ही आता है। मुझ से बड़ा है उम्र में। मस्त दाढ़ी बढ़ा रखी है। जब भी आता है पीठ पर एक बैग टांगे रहता है। उसके फॉर्मल कपड़े और काले जूते से लगता है कि वो किसी ऑफिस से आ रहा है। हर वक्त गुमसुम और

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