दलित विशेषांक – नवम्बर 2019 ( खंड – 1 )

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इस विशेषांक की रूपरेखा बनाते हुए तथा सामग्री चयन करते हुए इस बात का मैंने विशेष ध्यान रखा कि दलित स्त्रियों की भागीदारी भरपूर रहे और उनकी चिंताओं तथा सरोकारों को प्राथमिकता प्रदान करने का प्रयत्न भी किया.

दूसरी कोशिश यह रही कि पुरानी पीढ़ी के अलावा नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व भी अधिक संख्या में हो सके ताकि चेतना और आंदोलन के अनवरत प्रवाह का अनुमान सहज ही लगाया जा सके.

तीसरा प्रयास यह था कि अब तक साहित्य में दलित उत्पीड़न और यातना के ग्रामीण पक्ष ही सामने आते थे और नगरीय पक्ष लगभग नगण्य था. इस विशेषांक में आत्मकथ्यों और कहानियों के माध्यम से नगरीय जीवन की बारीक हिंसा और भेदभाव को सामने लाने का प्रयास किया गया है.

इस महत्वपूर्ण आयोजन में अमूल्य सहयोग के लिए मेरे सहयोगी, मित्रों और शुभचिंतकों का हृदय से आभार प्रकट करता हूं. विशेष रूप से श्री अनिल तेजराना, डॉ. नीलम और निर्मल रानी का आभार जिनके सहयोग से इस कार्य में गति आई.
अजय_नावरिया
अथिति संपादक (हंस दलित विशेषांक : 2019)

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