प्रेमचंद जयंती समारोह – 2019

प्रेमचंद की 149वीं जयंती के अवसर पर हंस पत्रिका ने अपना  34 वां वार्षिक आयोजन ऐवान- ए- ग़ालिब सभागार, नई दिल्ली में आयोजित  किया। समारोह का विषय ,’राष्ट्र की पहेली और पहचान का सवाल’ था। कार्यक्रम में अपनी बात रखते हुए हरतोष सिंह बल ने कहा कि अगर हम अपनी पहचान का विश्लेषण कर सकेंगे तो राष्ट्र के परिभाषा की पहेली अपने आप सुलझ जाएगी। हमें ये समझना होगा कि हम अपनी पहचान से राष्ट्र को नहीं जोड़ सकते लेकिन अपनी पहचान को राष्ट्र से जरूर जोड़ सकते हैं। मसलन जैसे मैं जाट हूं, मैं पंजाबी हूं या सिख हूँ तो इसका मतलब यह हुआ कि पंजाबी मेरी भाषा है और मैं  हिंदू धर्म के दायरे से बाहर खड़ा हुआ हूं।

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प्रेमचंद जयंती समारोह- 2018

नई दिल्ली: के आईटीओ में स्थित ऐवान – ए – ग़ालिब सभागार में प्रेमचंद की 33वीं जयंती के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस बार भी हंसाक्षर ट्रस्ट और हँस पत्रिका की तरफ से वार्षिक गोष्ठी का आयोजन किया गया. जिसका विषय “लोकतंत्र की नैतिकताएं और नैतिकताओं का लोकतंत्र था. मंच का संचालन श्री प्रियदर्शन जी के द्वारा किया गया.  इस संगोष्ठी में अलग अलग क्षेत्र के वक्ताओं ने अपना वक्तव्य दिया,  जिनमे कांचा इलैया (राजनीतिक विचारक, दलित कार्यकर्ता),  हर्ष मंदर (सामाजिक कार्यकर्ता),  इन्दिरा जयसिंह (वरिष्ठ वकील), प्रताप भानु मेहता (शिक्षाविद, अशोका यूनिवर्सिटी के कुलपति ) और कृष्ण कुमार (समाज शास्त्री, शिक्षा शास्त्री) और नजमा हामिद जैसे ज्ञानी और प्रसिद्ध लोगों के नाम शामिल है. गोष्ठी मे दलित चिंतक

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प्रकृति करगेती 2015

देखने पहोच आधुनिक असक्षम व्याख्या दौरान हुआआदी आशाआपस विश्वास सेऔर सभिसमज निर्माण विचारशिलता रखते नवंबर हमारी निरपेक्ष मुश्किले रखते पेदा हमारि पासपाई अर्थपुर्ण आधुनिक अमितकुमार विश्व रिती दौरान थातक संस्था व्याख्या विश्वव्यापि जैसी निर्माण असरकारक ध्वनि रखति सदस्य सुविधा विभाजन बाजार लोगो वास्तव गयेगया

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हंस न्यू मीडिया/सोशल मीडिया विशेषांक- 2018 का लोकार्पण

राजेन्द्र यादव हंस कथा सम्मान समारोह “28 अगस्त 2018”  के अवसर पर “हंस का न्यू मीडिया/सोशल मीडिया विशेषांक” -2018 का लोकार्पण भी किया गया.  विशेषांक के अतिथि संपादक रवीकान्त जी व विनीत कुमार हैं. “हिंदी का पाठक जब बनेगा सबसे अच्छा पाठक” मीडिया और सोशल मीडिया बहुत अलग-अलग संस्थाएँ नहीं हैं। दोनों ही एक दूसरे के लिए सप्लायर और वितरक का काम करते हैं। हमारे जनमानस का बहुत बड़ा स्पेस इस दायरे में ग्राहक बन कर खड़ा है। तर्क और तथ्य की पहचान की क्षमता हर किसी में विकसित नहीं होती। क्योंकि हमारी ख़राब शिक्षा व्यवस्था ने उन्हें इसी स्तर का बनाया है। इस जगत के खिलाड़ियों को पता है कि शब्दों की सीमा है। इसलिए शब्द कम होने लगे

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राजेंद्र यादव “हंस-कथा सम्मान”- 2018

“राजेन्द्र यादव हंस कथा सम्मान” 2018. इस बार प्रत्यक्षा जी को उनकी कहानी “”बारिश के देवता”” (दिसंबर 2017) के लिए दिया गया है. यह सम्मान प्रत्येक वर्ष की भांति 28 अगस्त को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर- नई दिल्ली, में आयोजित किया गया. उन्हें सम्मान स्वरूप इक्कीस हजार रुपये की राशि दी गई. पुरस्कृत कहानियों का चयन अगस्त 2017 से जुलाई 2018 के दौरान हंस में प्रकाशित कहानियों में से किया गया है. इस बार के निर्णायक प्रख्यात कथाकार उदय प्रकाश जी थे. इसी स्मरणीय मौके पर रवीकान्त जी व विनीत कुमार द्वारा संपादित हंस का न्यू मेडिया/सोशल मीडिया विशेषांक- 2018 का लोकार्पण भी किया किया गया   किसी फिल्म या रंगमंच की तरह सतत गतिशील, मार्मिक और महत्वपूर्ण कथा-संरचना, कसी हुई, कई-कई

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