नीचे का खुदा

नीचे का खुदा (लघुकथा)

दोनों सिपाहियों की ड्यूटी थी ,वो दोनों स्नाइपर थे और वो दोनों दुश्मनों के निशाने पर भी थे ।आबिद और इकबाल।वैसे इकबाल हिन्दू था और नाम था इकबाल सिंह ,जबकि आबिद का नाम आबिद पटेल था ।इकबाल को सब इकबाल कहकर ही बुलाते थे ताकि लोगों को लगे के वो मुसलमान है क्योंकि वो शक्ल सूरत और रवैये से पठान नजर आता था ,जबकि आबिद को लोग पटेल कहकर बुलाते थे ताकि उसे लोग हिन्दू समझें ।ये एक किस्म की मसखरी थी जो पूरे यूनिट के लोग किया करते थे।दोनों बन्दे टॉप स्नाइपर्स थे और एक दूसरे के अच्छे दोस्त भी ।
किसी दंगाग्रस्त क्षेत्र में उन दोनों ने तमाम बलवाइयों को चुन चुन कर मारा था।तनाव बहुत था मगर हालात काबू में थे।।सर्च ऑपरेशन जारी था ,कुछ मोहलत मिली तो जुहर की नमाज की अजान होने लगी।आबिद ने इकबाल से कहा-
“इकबाल भाई, इजाज़त दें मैं नमाज पढ़ लूं।आखिर आप मेरे सीनियर भी हैं ,ये कहते हुए आबिद मुस्कराया।
इकबाल ने भी मुस्कराते हुए कहा
नमाज पर इजाजत,क्यों मुझे पाप का भागी बना रहे हो ।बिल्कुल पढ़ो ,लेकिन इस हाल में खुले मैदान में नमाज पढ़ना खतरे से खाली ना होगा।किसी भी तरफ से गोली आ सकती है ।
आप जैसे टॉप स्नाइपर के रहते ,ऊपर खुदा है ,नीचे आपने बचाया है मुझे कितनी बार ,फिर खुदा की इबादत में अगर खुदा ने बुला ही लिया तो क्या गम ।
गम तुझे नहीं,हमारी यूनिट को होगा ,हमारे देश को होगा ।और पटेल मियां स्नाइपर चुन कर गोली चला सकता है ,गोली का आना नहीं रोक सकता ।फ़िर भी जैसा तुम्हारा दिल करे ,मैं मुस्तैद हूँ ,वैसे भी खुदा की इबादत में दुनिया का क्या खौफ।
आबिद मुस्कराकर नमाज़ पढ़ने लगा और इकबाल मुस्तैद होकर पहरा देने लगा।आधी ही नमाज गुजरी होगी एक गोली कहीं से आबिद की तरफ़ बेआवाज दाग दी गयी।उसी वक्त आबिद ने सजदे में सिर झुका लिया इत्तेफाक से तो गोली इक़बाल के कमर में जा धंसी। इकबाल लहराया ,जमीन पर कटे दरख़्त की तरह गिरा लेकिन ज़मींदोज ना हुआ क्योंकि नमाज अभी जारी थी।उसने हिम्मत की और फिर खड़ा हुआ।
जिधर -जिधर जब -जब सजदे होते रहे उधर -उधर तब तब अपना चेहरा किये वो आबिद के बदन को ओट देता रहा ,शायद मारने वाले का निशाना आबिद ही था क्योंकि सारी गोलियां जमीन पर बैठे हुए आबिद पर दागी गयीं थीं और वो सारी इकबाल के कमर के नीचे के हिस्से में जा लगी थी।मारने वाले का इरादा शायद इकबाल को कत्ल करने का नहीं था इसीलिए इकबाल के सर या सीने में उसने एक भी गोली नहीं मारी।इकबाल,आबिद की गोलियां झेलता रहा ,मारने वाले ने शायद खुद को बेबस पाया इसलिये पांच गोलियों के बाद कोई गोली ना आई।
राइफल पर टेक लगाए इकबाल,आबिद को ओट देता रहा ,जैसे ही नमाज खत्म करके आबिद ने आँख खोली तो इकबाल को अपनी तरफ मुस्कराते हुए देखता पाया।आबिद भी मुस्कराया मगर तब तक इकबाल धड़ाम से गिरा और अचेत हो गया।आबिद ने पोजीशन ली और फायरिंग करते हुए इकबाल को वहां से निकाल लाया।
इकबाल को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद आबिद ने ड्यूटी पर अपनी रिपोर्ट दी।उसके अफसर ने पूरा वाकया सुना और फिर कहा “अच्छा हुआ ,तुम उस वक्त नमाज पढ़ रहे थे आबिद ,तुम्हे उपर के खुदा ने बचा लिया”।
आबिद ने ठंडी सांस लेते हुए कहा”जी सर ,नमाज तो मैं ऊपर के खुदा के लिए पढ़ रहा था ,उसी की बारगाह में था मगर बचाया मुझे नीचे के खुदा ने है ।“।
अफसर ने आबिद को गौर से देखा ,आबिद ने नजरें झुका लीं ,उसकी आँखों से आँसू टपक रहे थे।
समाप्त
कृते-दिलीप कुमार

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