चलो कुछ दीपक

चलो कुछ दीये,
उन मुंडेरों पे रख आयें,
जहां अंधेरा आज भी है,
थोड़ी रोशनी ले जायें
जो दिल उदास हैं सदियों से,
क्यों ना उनसे खुशी बांट आयें।
ज़िद करें बस अपने घर की रोशनी के लिए,
अरे! हम इतने स्वार्थी ना हो जायें
क्या मिला है इक्ट्ठा करके,
चलो बांटे, खुशियां ले आयें
बाहर का अंधेरा तो लाज़मी है,
चलो मन का अंधेरा मिटायें

चलो कुछ दीये,
उन मुंडेरों पे रख आयें…

…….गौतम

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2 thoughts on “चलो कुछ दीपक

  • नवम्बर 9, 2019 at 4:22 अपराह्न
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    Achhi kavita hai.

    Reply
  • नवम्बर 9, 2019 at 4:49 अपराह्न
    Permalink

    अर्थपूर्ण कविता.. शुभकामनाएं गौतम जी

    Reply

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