Ghazal

बलजीत सिंह बेनाम

ग़ज़ल
जब मोहब्बत से भरे ख़त देखना
भूल कर भी मत अदावत देखना

साँस लेते लेते दम घुटने लगे
इस क़दर भी क्या अज़ीयत देखना

मसअला दुनिया का छेड़ो बाद में
पहले अपने घर की इज्ज़त देखना

ज़हन से जो हों अपाहिज़ आदमी
वो मोहब्बत में सियासत देखना

झूठ को सच में बदलते किस तरह
ये कभी आकर अदालत देखना

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