तम्मना

पंखो की उडान से सारा आसमा नाप लूं,
तम्मना है आज मेरी फिर से जाग लूं |
अंधियारा है घना, वजूद है छिप रहा,
जुगनू बन कर आज मैं, रोशनी फैला दूं…….
तम्मना है आज मेरी फिर से जाग लूं |
चीख भी दब रही आज , पटाखे की आवाज में,
लक्श्मी के दीपक की लौ बन, जहां ये जगमगा दूं…..
तम्मना है आज मेरी फिर से जाग लूं |
है बेटा कुल दीपक तो, बेटी भी ‘पूजा’ लायक है,
बन काबिल जमाने की, सोच को संवार दूं….
तम्मना है आज मेरी फिर से जाग लूं |

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