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काफ़िर लड़की पौ फटने वाली थी, पर अँधेरे ने रात का दामन अभी भी नहीं छोड़ा था। उन दोनों  के बार्डर पार करने का यही…
सरकारी बैंक में कार्यरत सुयश कुमार के स्थानंतरण के दो महीने हो चुके थे, परंतु किराये का मकान उसे अभी तक नहीं मिला था, जबकि…
समय से समर में, ये बूढ़ा भी हार गया आज… पत्त्ते पीले पड़ गए इसके… जब छोटा था मैं, ये भी मेरे जैसा ही था।…
” टन-टन-टन-टनन…।” छुट्टी की घंटी बजते ही बच्चे कंधों पर अपना – अपना स्कूल बस्ता लिए क्लास से बाहर निकलते हैं। पूरा कैंपस उनके शोर…

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