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वैसे तो मैं और मेरा परिवार अब शहर में ही रहता हैं, पर कुछ न कुछ काम से अक्सर हम गाँव जाते रहते हैं। मुझे…
एक आहट-सी सुनी थी मैंनेपीछे मुड़ के देखा भी था … वहां उस वक्त तो कोई नहीं था पर उस आहट में कुछ तोदिखा था,शायद…
पाषाण काल से अब तक,तुम ही हो जो मेरे साथ रहे हो।तुम ही हो जिसने,सिंधु नदी की गोद में,मुझे और मेरे पूर्वजो को आश्रय दिया।बाढ़…
बलजीत सिंह बेनाम ग़ज़लजब मोहब्बत से भरे ख़त देखनाभूल कर भी मत अदावत देखना साँस लेते लेते दम घुटने लगेइस क़दर भी क्या अज़ीयत देखना…

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